पीएम मोदी के आहवान पर लोकल को वोकल बनाने के लिए आगे आई मैत्री संस्थाः नम्रता नारायण


विजन लाइव/गौतमबुद्धनगर

पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था एक खतरनाक और अदृश्य कोरोना के भयानक आक्रमण के कारण छिन्न - भिन्न सी हो चुकी है। ऐसे भयानक संकट के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प पीएम मोदी के दूरदृष्टि और साहस का ही नतीजा है। इससे अब पुरे भारत में लोकल को वोकल बनाने की एक होड़ सी लग गई है। लोगों के इस जज्बे को देखते हुए पीएम की उत्कृष्ट योजना लोकल टू वोकल के संकल्प तहत मैत्री एक परिचय संस्था ने लघु उद्योग से जुड़ी महिलाओं के घरेलू सामानों को बाज़ार से जोड़ने का कार्य वृहद पैमाने पर करना शुरू कर दिया है। नाम के अनुरूप महिलाओं की मित्र बनकर मैत्री संस्था उनके समान को बड़े -बड़े आउट लेट में उपलब्ध करा रही है, ताकि इन्हें बाजार या खरीद्दार के लिए भटकना नहीं पड़े, जिसके अभाव में लाखों लघु उद्योग सुस्त पड़े है। संस्था का संकल्प है कि वह अपने महिला मित्रों एवं उनके प्रोडक्ट को बाजार में भरपूर सम्मान भी दिलाएगी। मैत्री एक परिचय संस्था यह कार्य सेवा समझकर पुरे मनोयोग से कर रही है। संस्था की संस्थापिका नम्रता नारायण का कहना है कि उनके साथ कई राज्यों की लघु उद्योग से जुड़ी महिलाएं जुड़ चुकी है और पीएम मोदी के आहवान के बाद इनमें बहुत उत्साह है। आज इनके प्रोडक्ट दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों के बड़ी दुकानें, प्रसिद्ध बाजार और मॉल में भी बिकने लगे है। संस्थापिका नम्रता नारायण ने इस मौके पर देश के लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में अधिक से अधिक लोकल सामानों का उपयोग करे। इससे उन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा और  देश की तरक़्क़ी भी होगी। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि चीनी सामानों का बायकाट किया जाए और इस मुहिम से जुड़कर आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए एकजुट हों और पीएम मोदी एवं देश के सपनों को साकार करें। नम्रता नारायण बताती हैं कि सीमा रस्तोगी, जो कि ग्रेटर नोएडा में रहती हैं, पिछले कुछ सालों से घर से ही नमकीन बना कर सोसाइटी में ही बेच रहीं थी और वो अपने सामान के लिए न तो मार्केटिंग कर सकती थी और न इसके लिए उनके पास पैसे थे। ऐसे में मैत्री संस्था ने उनकी मद्द की और अब उनके सामान बड़े-बड़े आउट लेट के माध्यम से बिक रहे हैं। ऐसे ही दिल्ली की अफ़रोज़ घर में अपने हाथों से चुडिया और जंक जुलरी बनाती हैं, अब उन्हें भी मैत्री संस्था ने बाज़ार से जोड़ा है। इस तरह से अनेक लघु उद्यमियों को जोड़कर लोकल को वोकल बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। संस्था के लिए कार्य कर रहे पुनीत गोस्वामी का कहना है कि चीन भारतीय बाजार के सहारे ही हमें आंख दिखता था। एलएसी पर मात देने के बाद अब उसे आर्थिक रूप से भी सबक देना जरूरी है। यह स्वदेशी भावना के तहत लोकल को वोकल बनाकर किया जा सकता है।